वो खबर न बनें तो बेहतर होगा
जहां इंसान इंसान नहीं
पैसे का जहां सिर्फ खेल
जहा पैसे के आगे सस्ती हो जाएं
इंसानों की जिंदगी
जहां कोई दो रोटी को तरसे
किसी के सिर पर हीरों का हार बरसे
जहां सब कुछ सिर्फ दिखावा
का हो
जमीनी स्तर पर गरीब पर हर मार बरसे
वो खबर न बनें तो बेहतर होगा
जहां इंसान अपनों का नहीं
नेताओं के आगे अफसर की एक नहीं
जहां हताश ज्यादा निराशा के बीच इंसान दम तोड़ दे।
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