इंसान तो तुम कहलाने के लायक नहींइंसान तो तुम हो नहीं
जहां अपने बदले के लिए तुम
इंसान के टुकड़े कर देते हो
अपने प्रतिकार के लिए तुम
हर किसी की परेशानी को बढ़ा देते हो
जहां तुम्हें दिखाई देती सिर्फ तुम्हारी तकलीफें
दूसरों का सिर भी तुम कत्लेआम कर देते हो।
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