Discrimination: इसे दोगलापन न कहूं तो क्या





इसे दोगलापन न कहूं तो क्या
जहां आज मानवता सारी हदें पार की जा रही है
भाषा जहां सबकी खराब सी हो रही है
वहां तब भी उम्मीद हम से 
भोली भाली लड़की बनकर 
रहने की जा रही है
जहां तुम चाहे हजार गली दो
पर हम जी हजुरी करते
चुप रहे
तुम हर किस्म की गली दो
हम सिर्फ हां जी हां करते रहे
जहां तुम्हारी हर गलती हो माफ
हम गलत न होने पर सिर नीचा कर चले
इसे दोगलापन न कहे तो क्या
जहां लड़की लड़की न होकर
तुम्हारे लिए गूगी गुड़िया बनकर रहे। 

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