World Press freedom Day: 29 जनवरी 1780 वो तारीख जब भारत का पहला अखबार, बंगाल गजट James Augustus Hickey जेम्स ऑगस्टस हिक्की के द्वारा निकाला गया था। वो दिन था और आज का दिन है। जब देश में भले अखबार और मीडिया संस्थानों की कमी नहीं है।
किन्तु जैसे आज उसकी स्वतंत्रता पर एक प्रश्न चिन्ह सा बना हुआ है?
ये बात गौर करने वाली है कि आजादी से पहले देश के मीडिया का उद्देश्य आजादी दिलाना था। आजादी के बाद उसका उद्देश्य बदला। वो मिशन से प्रोफेशन में बदला।
हालांकि इस बीच देश के सरकारी मीडिया ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई। जहां 'ऑल इंडिया रेडियों' काफी लंबे समय तक लोगों की आवाज बना रहा।
किन्तु उस मीडिया को तब धक्का लगा। जब देश में सन् 1975 के आपातकाल की घोषणा हुयी। प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोई कसर नहीं छोड़ी गयी। जहां अखबारों पर सेंसरशिप लगा दी गयी।
इसके बावजूद बहुत से अखबारों ने अपना काम जारी रखा। कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों की तब भी पत्रकारिता जारी रही। जिन्होंने शासन के सामने झुकाने की वजह जेल जाना मुनसिब समझा।
जैसे जैसे समय बदला। मीडिया का काम भी बदलता चल गया।
जहां आर्थिक उदीकरण ने मीडिया संस्थान को विस्तार में सहायता दी। वहीं मीडिया का उद्देश्य भी बदला। जहां 'प्रॉफिट मैंकिग' की पॉलिसी कहीं न कहीं मीडिया में घर कर गयी। इसके बावजूद जनता की आवाज सुनने वाला मीडिया अपने काम को करता रहा।
समय बदला। मीडिया बदला। उद्देश्य बदला। आज हालात क्या है? ये हम सब भली भांति जानते है। जहां कुछ मीडिया संस्थान को छोड़ दिया जाएं, तो मीडिया का अस्तित्व धुंधला सा दिखाई दे रहा है। जिसका नाम आज 'गोदी मीडिया' कर दिया गया है। जो जनता की आवाज की जगह किसी एक पक्ष का मीडिया बन चुका है।
इसके बावजूद बहुत से ऐसे मीडिया संस्थान, पत्रकार है। जो अपने काम को बखूबी कर रहे है। जो लोगों की आवाज बन रहे है। फिर भले क्यों न इस बीच उन पर ईडी, राजद्रोह, मानहानि जैसे कानून लगा, उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया जाएं।
उन सबकी पत्रकारिता को हमारा नमन है। जो हर परेशानी के बावजूद जनता आवाज बनना नहीं छोड़ रहे है। जिन्होंने मीडिया को जीवित रखा है। जो जनता के लिए आज भी उतने समर्पित है। जितने की कल थे।
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