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Politics: तेज गर्मी के साथ बढ़ रही है देश में सियासत की सरगर्मी




एक तरफ देश में गर्मी ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए है। जिसने जनता का हाल बेहाल कर दिया है। दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव के बीच सियासत में सरगर्मियां बढ़ सी गयी है।

जहां 4 जून के परिणाम को लेकर राजनेता सोच में पड़ गए है।सबकी रातें अंतिम हर दिन, अब उनके लिए भारी से पड़ रहे है। साम, दाम और दड़, भेद से की जा रही राजनीति पार्टियों को कितनी सीट दिलाती है। जनता का भरोसा वो जीत भी पाती है या नहीं। ये देखना बड़ा दिलचस्प होने वाला है।

हालांकि सरकार किसी की भी आएं जनता के लिए मंहगाई कम होने  वाली है। न ही रोजगार के घट रहे अवसर । उल्ट उसे तो अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है । जहां मूलभूत चीजों पर मिल रही सब्सिडी भी खत्म होने कगार पर है।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..