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Opposition:विपक्ष के कमजोर होने का मतलब




  Opposition: एक लोकतांत्रिक देश में जनता के अपनी सरकार का चयन करती है। जिसमें जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा बनाया गया शासन होता है जिसे हम 'लोकतंत्र' की कहते है। किन्तु इसकी नींव तब कमजोर होने लगती है। जब विपक्ष कमजोर हो जाता है। जो सत्ता में बैठी सरकार से सवाल पूछने का काम करता है। उसकी जवाबदेही तय करता है।

जब वहीं कमजोर हो जाता है तब लोकतंत्र ध्वस्त दिखाई देने लगता है जो एक गैर उत्तरदायी सरकार से कहीं ज्यादा बुरा होता है जहां दोनों मिलकर अक्सर तबाही ही लाते है।

इन तीन कारण से समझें विपक्ष का कमजोर होने का मतलबः

  • जनता के प्रति जवाबदेही खत्म होना- जैसा कि हम सब जानते है कि एक लोकतांत्रिक देश में पक्ष विपक्ष का मजबूत होना जरुरी होता है। जहां विपक्ष न सिर्फ सरकार की नीतियों पर सवाल जवाब करता है बल्कि सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही भी निश्चित करता है। जब विपक्ष सत्ता के सामने प्रश्न पूछने की हिम्मत करने में असमर्थ हो जाता है। तब सरकार की जनता के प्रति जवाबदेही कम होने लगती है।

  • सरकार की संवैधानिक भूमिका का कमजोर होना- विपक्ष का काम केवल सरकार के कामों पर निगरानी रखना ही नहीं है। बल्कि ये देखना भी है कि सरकार जो नीतियों को अपना रही है। वो संवैधानिक नियमों के अनुरूप है कि नहीं। जो किसी भी सरकार को संवैधानिक नियमों के अनुरूप चलने पर विवश करती है।

  • जनता के हितों की रक्षा न होना - एक लोकतांत्रिक देश में जनता का हित सबसे ऊपर होता है। जब उसके हितों के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की जाती है। तब विपक्ष में बैठी पार्टियों का ये कर्तव्य होता है। कि वो सरकार से सवाल करें। जनता के हितों की रक्षा करें। सरकार को उनके काम बताएं।


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