तापमान बढ़ रहा है
सूरज तप रहा है
पेड़ काट रहे है
इंसान दिन रात प्रगति कर रहा है।
विकास का क्रम बदल रहा है
आधुनिकता की अंधी दौड़ में
मानव कुछ नहीं देख रहा है
अगर ऐसा ही चलता रहा
तो अस्तित्व उसका भी कुछ
खास न रहेगा
ये उसे समझना और भी आज जरूरी है
जब सूरज सातवे आसमां पर है
गर्मी के मारे इंसान चुभती गर्मी का
शिकार हो रहा है
अगर अब भी न बदले तो
बहुत कुछ घट जाएंगा
इंसान को समझना होगा
धरती तप रही है
पेड़ काट रहे है
अगर अब भी नहीं न रूका वो
तो जल्द ही सबकुछ समाप्त होने की कगार
पर आ जाएगा
समझना होगा
वरना वो भी न बच पाएगा।

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