Election: ये सिर्फ चुनाव नहीं
जनता के साथ होता
बड़ा खेल है।
जहां चाहे जो जीते हैं
जनता की दोनों तरफ़
से सिर्फ हार है।
चुनावी मौसम में
लगता भावनाओं का बाजार है
जहां हर कोई पूछेंगा जनता की जरूरत क्या है?
उसका क्या दुख दर्द है?
चुनाव निकल जाने पर यहीं कहेगें 'हम आपके कौन है' ?
चुनाव चुनाव नहीं
बना नौटंकी का गढ़ है
भावनाओं के साथ खेल
करते अपने सपने ये पूरे हैं।
जहां दुर्योधन को पूजा जा रहा है
हर जगह बैठी आज दौपद्री
उसकी लाज लेने वाले को ही मिल रहा है जनता का वोट है ∣
ये सिर्फ चुनाव नहीं
षड्यंत्र का गढ़ है
शतरंज का खेल जहां
जीतने वाला, फिर कोई सौदागर है ∣
आओं इस कड़ी को तोड़े हम
दे वोट उसे
जो लायक हो,
जो झूठ नहीं सच पर बात करता हो
ये चुनाव है
लोकतंत्र का त्यौहार है
इसमें अपना फर्ज निभाएं
अपने वोट का सही उपयोग करें हम ।

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