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Chhindwara Crime: क्या हो जब इंसान अपनों का ही हत्यारा बन जाएं




छिंदवाड़ा में हुई घटना मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। जहां एक व्यक्ति अपने ही परिवार के लोगों का बेरहामी से एक एक कर कुल्हाड़ी से हत्या कर देता है। जिस बीच वो उन नन्हें मासूम को भी नहीं छोड़ता है। जो अच्छी तरह से ये भी नहीं जानते है कि उनका उस आरोपी से क्या सम्बन्ध है।
अफसोस आरोपी किसी को भी नहीं छोड़ता है। और अंत में खुद भी फांसी लगा आत्महत्या कर लेता है। ये घटना प्रदेश या देश में हुई कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ घट चुकी है। पर सवाल ये उठता है कि क्या सच में आज अपराध की सीमाएँ पार हो गयी है।इंसान इंतना ज्यादा परेशान और मानसिक रोगी हो गया है कि वो अपनी ही दुनिया खत्म करने में लगा है। बेरहाल चाहे कारण कुछ भी हो किन्तु इतना तो निश्चित है कि आज हम जिस के लिए जानते थे वहीं सबसे ज्यादा हास हो रहा है। वो है शांति।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..