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Chennai: ट्रोलिंग जब किसी की जान ले ले



यू तो सोशल मीडिया लोगों को सहारा देने का काम करता है। उनकी आवाज बनता है। 
पर कई बार यहीं सोशल मीडिया किसी की जान भी ले लेता है।जहां ट्रोलिंग से तंग आ लोग, इसके चलते गलत कदम उठा लेते है।

ताजा मामला चेन्नई का है। जहांं एक महिला ने सोशल मीडिया की ट्रोलिंग से परेशान होकर खुदखुशी कर ली है।

ये है पूरा मामला

बता दें कि पिछले माह चेन्नई निवासी एक महिला रम्या से गलती से अपनी बेटी हाथ से छुट गयी थी। जहां वो अपनी सात  माह की बेटी को अपार्टमेंट की चौथे मंजिल पर ब्रेस्टफीडिंग करा रही थी। तब अचानाक बच्ची उनके हाथ से फिसल पहले मंजिल के छज्जे पर जा गिरी। हालांकि 15 मिनट के अंदर बच्ची को सुकुशल बचा लिया गया। किन्तु इसके बाद शुरू हुआ ट्रोलिंग का सिलसिला जिसने एक हंसता खेलता परिवार उजाड़ दिया।

सोशल मीडिया पर शुरू हो गयी थी ट्रोलिंग

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आने से , जहां एक ओर लोग बच्ची को बचाने वाले की तारीफ कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर रम्या को लापरवाह मां के नाम से ट्रोल कर रहे थे। जिसके बाद रम्या अपने पति और पांच साल के बेटे , 7 माह की बेटी को ले अपने मायके आ गयी। जहां रविवार को रम्या ने खुदखुशी कर ली। 

ट्रोलिंग पर कसा जाना चाहिए शिकंजा

हर चीज की एक सीमा होती है। जब वो पार कर दी जाती है। तब वो एक भयानाक रूप ले लेती है। ट्रोलिंग भी आज हमारे देश की एक समस्या बन गयी है। जहां पर कई बार निर्दोष लोग शिकार हो जाते है। बिना पूरी घटना जाने लोग गलत, सही बताने लगते है । फिर भले घटना के पीछे का कारण कुछ और क्यों न हो। 



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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..