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Cannes Festival 2024: कान फेस्टिवल में अपना जलवा बिखेरने वाली कौन है नैन्सी त्यागी





कहते है सपने अगर देखों। तो उसे पूरा करने के लिए हिम्मत भी उतनी चाहिए होती है। वो भी तब जब हमें हारने की कोशिश सब जगह से की जा रही हो। उसके बावजूद जो हारे नहीं बल्कि अपने जुनून को बनाये आगे चलता रहे, उसे दिल से सलाम करना चाहिए। 
 
ऐसी ही एक मोटिवेशनल कहानी उत्तर प्रदेश की 'नैन्सी त्यागी' की है। जो भारत की ओर से फैशन इंफ्लुंएसर के रूप में 77 वां कान फेस्टिवल में रेड कार्पेट पर अपना जलवा बिखेर रही है। जो आजकल सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड कर रही है। 

कभी खर्च के लिए शुरू की थी सिलाई

बता दें कि नैन्सी त्यागी 12 वीं के बाद दिल्ली में आगे की पढ़ाई के लिए शिफ्ट हुई थी। किन्तु इसी बीच कोरोना के चलते उन्हें पैसें का मोहताज होना पड़ा। ऐसे में अपने खर्च के लिए नैन्सी ने अपनी मां की सिलाई मशीन पर कपड़े सिलाने का काम शुरू किया। अपने डिजाईनर ड्रेस बना सोशल मीडिया पर साझा किया। फैशन इंफ्लुंएसर के तौर पर लोग के बीच गयी।
शुरू शुरु में तो कुछ लोगों ने उनका काफी मजाक बनाया। किन्तु वो रूकी नहीं आगे चलती गयी। 
देखते ही देखते वो सोशल मीडिया पर इस तरह पॉपुलर हुई। कि आज वो दुनिया के सबसे बड़े फिल्म फेस्टिवल कान में रेड कार्पेट पर अपना जलवा बिखेर रही है। जहां वो पिंक कलर का गाउन पहने नजर आ रही है। जहां सबकी निगाहें उन पर टिकी हुई है।

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कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..