Skip to main content

Arvind Kejriwal: क्या अरविंद केजरीवाल की रिहाई बदल रही है समीकरण


देश में लोकसभा चुनाव के बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जेल से रिहाई की खबर सामने आयी है। जिसने कई लोगों को चिंता में डाल दिया है। जहां अब तक लड़ाई कांग्रेस बनाम भाजपा चल रही थी। वहीं अब इस बीच आप की शानदार एंट्री होती नजर आ रही है। जहां आम आदमी  पार्टी के कर्ता धार्ता अरविंद केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम बेल मिल गयी है।

ऐसे में ये सवाल उठना लाजमी है कि क्या केजरीवाल की रिहाई देश की सियासत में बड़ा उलटफेर कर सकती है लोकसभा चुनाव में प्रभाव डाल सकती है? या फिर मोदी है तो मुमाकिन है कि गारंटी लोकसभा चुनाव में कायम रहने वाली है?

 क्या है पूरा मामला 

बता दें कि 21मार्च को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले के मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। जिसके बाद केजरीवाल ने चुनाव प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी। जिस पर अब  सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है। गौरतलब है कि दिल्ली की 7 लोकसभा सीट पर 25 मार्च को चुनाव होने जा रहे है। जिसके लिए केजरीवाल प्रचार करने वाले है। 

ऐसे में अब ये देखना बड़ा ही दिलचस्प होने वाला है कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी से रिहाई तक की घटना दिल्ली वासियों के लिए किस तरह से प्रभाव डालती है। 

 

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..