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Advertisement: आखिर कब तक सेलिब्रिटी हमें विज्ञापन के जरिए, मूर्ख बनाएंगे



कितनी अजीब बात है जिन सेलिब्रिटी Celebrity को देवता मान हम पूजते है। जिनके बारे में एक गलत शब्द हम नहीं सुन सकते है। जब यहीं सेलिब्रिटी कुछ पैसे के चक्कर में बिना सोचे समझे विज्ञापन  Advertisement  कर हम  जैसे करोड़ो लोगों की भावनाओं के साथ खेलते है। जिन्हें हम अपना भगवान मानते है। जहां बिग बी से ले खान तक सब जनता को मूर्ख बनाने का काम करते है। जिसका शिकार कई बार नन्हे बच्चे से लेकर युवा तक होते है। जो आंख बंद कर उन पर विश्वास कर लेते है। फिर चाहे पैकेट के पीछे की सच्चाई कुछ और क्यों न हो।


पर अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट काफी सतर्क हो गया है। जहां कोर्ट ने पतंजलि के खिलाफ भ्रामक विज्ञापन के मामले पर सुनवाई करते हुये बड़ा अहम फैसला सुनाया है। जो जनता के लिए बड़ी राहत है।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भ्रामक विज्ञापन के मामले में  बड़ा फैसला सुनाया है। जिस मामले की अध्यक्षता जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने की है। अपने फैसले में पीठ ने कहा है किसी प्रोडाक्ट का विज्ञापन करते हुये सोशल मीडिया इंफ्लुंसर, सेलिब्रिटी भी उतनी ही जिम्मेदार होगी। जितना की विज्ञापनदाता होगें।  जिसके लिए अब विज्ञापनदाता को 'Cable TV Network Act 1994'  के तहत स्वघोषणा पत्र देना होगा।  जिसमें उसे अपने विज्ञापन को पहले Information Department के अंतर्गत ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल पर उपलब्ध कराना होगा। उसके बाद ही कोई विज्ञापन प्रसारित होगा।

जागो ग्राहक जागो

24 दिसंबर को यू तो हम सब 'राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस' मानते है। किन्तु उसके दूसरे ही दिन हम अपनी जागरूकता खत्म कर, अंधी दौड़ का हिस्सा बन जाते है। जहां किसी भी प्रोडाक्ट की एक्सपायरी डेट देख हम अपनी जिम्मेदारी पूरा समझते है।
जहां टीवी पर चल रहे 24 घंटे के विज्ञापन , जो अब हमारे मोबाईल फोन तक पहुंच गये है। उन पर बिना सोचे  समझे हम विश्वास कर लेते है। बिना एक पल ये सोचे की क्या हमें उसकी जरूरत है, क्या ये सुरक्षित है? 

आज हम सबको ये समझने की जरुरत है कि विज्ञापन में दिखाई जा रही हर चीज जरूरी नहीं सही ही हो। उसका प्रचार कर रहे सेलिब्रिटी कई बार गलत हो सकते है। भावनाओं में आ अपनी जिंदगी के साथ खिलवाड़ न करें। 



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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..