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World: दुनिया क्या है ये हम तब समझते है






World: हम सब का दुनिया को देखने का नजरिया अलग  है। जिसे हम 'Frame of Reference' कहते है।  जिसमें हमारे जीवन के अनुभव, सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियां शामिल होती है।

 इसके बावजूद जब हम दुनिया को समझने घर से निकलते है। तब बहुत सी चीजें पर अपनी सोच बदलते है। नये - नये अनुभवों को लेते हम दुनिया की सच्चाई से रुबरु होते है।
इस बीच कई बार हमारा खुद पर विश्वास कम सा हो जाता है। कई बार हम सच से दूर भागने लगते है। कई बार हमारे विश्वास से अलग दुनिया की सोच होती है।
इस बीच जब हमारा दुनिया की उस सच्चाई से वास्तां होता है। जिसके बारें हमने सुना तो बहुत कुछ पर देख पहली बार होता है।
 
तब हम बदल जाते है। कई बार सवाल खुद से करने लग जाते है। बहुत मुश्किल हो जाता है अपने सवालों के हर जबाव खोजना... इस बीच कब हम सीधे साधे इंसान से दुनिया की चालकियां सीख जाते है। 
इस मतलबी दुनिया में जहां हर चीज अपने मतलब से शुरु होती है... उस बीच आ, कई बारॉहम जैसे खुद के सिद्धांत से समझौत करते है। तब कई बार जब ये समझौता करना मुश्किल हो जाता है। तब हम एक अलग तरह का संघर्ष करते है। जिसे हम स्वयं अपने आप से लड़ते है।

दुनिया के बीच आकर संघर्ष क्या है
उसका असली मतलब हम तब जानते है
सच और गलत में फर्क को समझते है।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..