Time will write the crimes of those who are neutral: जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके भी अपराध





आज देश के हालात कुछ इस तरह से है। जहां सरकार की आलोचना करना मतलब अपने घर 
में  ED का बुलावा या IPC Indian Panel Code की धारा 124 के तहत 'राजद्रोह' के जुर्म में सलाखों के पीछे जाना है।जो जैसे देश में आज ट्रेंड सा हो गया है।

 देश के जैसे हाल बयां करती है

जहां लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कह जाने वाला 'मीडिया' आज सरकार के सामने बौना होता नजर आ रहा है। वहीं दूसरी तरफ अदालतों में केसों की लगी लंबी कतारें, जैसे देश की जर्जर होती व्यवस्था पर तंज कस रही है

अपनी पार्टी को ही नहीं जोड़ पा रही है कांग्रेस

इस सब के बीच जो चीज सबसे ज्यादा देश को कमजोर बना रही है। वो है देश का कमजोर होता विपक्ष, जो हर दिन कमजोर होता नजर आ रहा है। 
जहां देश की सबसे पुरानी पार्टी Congress में आज हाल ऐसे है जो भले 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' कर देश जोड़ने की बात करती है। लेकिन खुद अपनी पार्टी में बरसों से काम कर रहे लोगों के साथ, न्याय करने में असमर्थ दिखाई दे रही है। जहां मध्य प्रदेश में हर दिन पार्टी छोड़ बीजेपी में जाने वालों की कमी नहीं है।

देश की राजनीति जो आज है संकट में 

दूसरी तरफ कभी भष्ट्राचार के खिलाफ लड़कर, लोकायुक्त की स्थापना करने वाले आम आदमी पार्टी  के संस्थापक 'अरविंद केजरीवाल'आज खुद भष्ट्राचार के मामले में जेल की सलाखों के पीछे है। ऐसे में भला आज हम कैसे ये कह दे कि देश की राजनीति से हमारा कोई भी वास्तां नहीं है।  


आज तटस्थ रहने का मतलब 

जहां आज देश में आम चुनाव की घड़ी करीब है। जो लोगों को उनके वोट की कीमत बताती है। जो किसी भी लोकतंत्र वाले देश के लिए बहुत ही जरुरी चीज है। तब हम और आप कैसे कह सकते है कि हमारा राजनीति से कोई भी मतलब ही नहीं है। हम इस विषय में बिल्कुल तटस्थ है। जो हो रहा है वो होने दिया जाएं। जहां हमारा भविष्य ही आने वाली सरकार और उनकी नीतियों पर टिका है। 

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