Skip to main content

Nirmal Verma: निर्मला वर्मा का निबंध, जो आज भी पढ़ा जाना चाहिए



आज के समय में जब इंसान के पास समय कम चिंताएं ज्यादा है। ऐसे समय में कुछ पल के लिए दिल और दिमाग को सुकुन देने वाला अगर कुछ है तो वो साहित्य है।
जो व्यक्ति को अनुभव के मुताबिक, हर बार कुछ अलग अर्थ देता है। जितना उसका अनुभव होता है। उतना ही वो किसी साहित्य से ले पाता है। 

इसी को विस्तार देते हुए हिन्दी साहित्य के महान लेखकों में शुमार निर्मल वर्मा Nirmal Verma का निबंध 'साहित्य क्या करता है क्या करती है कला' हमें साहित्य के असली अर्थ से रूबरु करता है।

काले शब्दों में छिपा हुआ होता है जादू

जिसमें लेखक निर्मला वर्मा कहते है कि साहित्य में होते भले काले- काले शब्द ही है। लेकिन जब हम उसे पढ़ने बैठते है। उसकी दुनिया में खो सा जाते है। जहां एक वक्त के लिए जीवन की परेशानी से अलग हम किसी दूसरी दुनिया में प्रवेश कर जाते है। जहां हम खुद के किरदार को खोजने लगते है।

हर किरदार के मर्म को समझते है हम

वर्मा बताते है कि साहित्य एक ऐसी विधा है जिसके जरिए व्यक्ति अलग - अलग किरदार के अनुभव को ग्रहण करता है। जहां वो कभी एक प्रेमिका की वेदना को समझता है। तो कभी मां की करुणा में डूब सा जाता है। पिता के त्याग की असली ताकत को वो समझ पाता है। ये साहित्य ही है जो इंसान को एक किरदार के अलावा अनेक किरदारों से परिचय करा जाता है।

आज के समय में साहित्य

आज जहां हर कोई इंसान कम मशीन ज्यादा बनने लगा है। जहां पर उसके अंदर की इंसानियत कम सी होने लगी है। वहां वो अपने जीवन के तनाव और परेशानी से निकल नहीं पा रहा है। ऐसे समय में साहित्य ही है।जो इंसान को जीवन की वास्तविकता से दूर एक काल्पनिक दुनिया में ले जाता है। जो उसे जिज्ञासु बनाता है।

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..