शक्ति की स्वरुपा जो दुर्गा ,काली,आदिशक्ति का रुप है। जिसके सहारे हम इस दुनिया को जीते है। जब लगने लगता है कि सबकुछ खो सा रहे है। जिंदगी में कुछ भी शेष नहीं है। परेशानियां जहां ज्यादा हम उनसे निपट कम पा रहे है।
जिंदगी की परेशानियों में हम कहीं खो सा रहे है। ऐसे वक्त मां ही तो है जिनकी आराधना कर हम मन में शांति पाते है।
चाहें जीवन में आ जाएं कितनी परेशानियां किन्तु उनसे निकलने का रास्ता हमें मां ही तो दिखाती है।
करने बैठते है जब 'मां का ध्यान तब दुनिया की सारी परेशानियों को भूल जीवन में सकारात्मकता पाते है'।
अनिश्चिताओं के बीच जहां कुछ भी निश्चित नहीं है। जीवन में केवल निराशाओं के काले बादले है। जहां कई बार हम फंस सा जाते है। ऐसे वक्त में जब हम करते है तेरी आराधना मां तब हम खुद को पाते है।
दुर्गा चालीसा की ताकत ही तो है जिसे सुनों हम मन में शांति सा पाते है। मन में उठ रहे सारे प्रश्नों के उत्तर हमें मिल से जाते है। जब कोई हमें समझने वाला नहीं होता। तब मां ही तो है जिनकी आराधना कर हम मन में उठ रहे सभी तूफानों से निजाद पाते है। जिनके आगे सारे देव नतमस्तक हो जाते है।
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