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Mangalsutra : देश में मंगलसूत्र के अलावा क्या कोई मुद्दा नहीं है




इसे राजनीति का गिरता हुआ स्तर कहें या उसका खोखलापन किन्तु आज की सच्चाई यहीं है। कि लोकसभा चुनाव में राजनीति पार्टियां मूल विषय को छोड़ उन विषय का सहारा ले रही है। जिनका देश के विकास से कोई मतलब ही नहीं है।
आज जहां देश में अनेक तरह की परेशानी घर कर रही है। आम जन को उनकी मूलभूत चीजें नहीं मिल रही है। युवा बेरोजगार के चलते तनाव में जी रहे है। किसान मौसम की मार सह रहे है। अमीरों गरीबों में खायी  लगातार बढ़ रही है।  
इसके बावजूद आज देश में बात इस चीज की हो रही है। कि वो शादी शुदा होने के बावजूद मंगलसूत्र क्यों नहीं पहनती है?
 इसके पीछे की वजह जो भी हो। किन्तु इस विषय को सत्ताधारी सरकार के द्वारा तूल देकर, इसका जवाब देने के चक्कर में बाकी सभी विषयों को भूल जाना बिल्कुल सहीं नहीं है।
जिसके लिए आम जन से लेकर राजनीतिक पार्टी दोनों जिम्मेदार है। जो ऐसी बकवास बातों को सुन रही है। फिर भले क्यों वो राशन की लगी लंबी दुकानों से मायूस होकर  लौटे। 
मूल विषय से हटकर सादियों पहले की गलती पर प्रश्न करना कतई सही नहीं है। 
आज राजनीति का गिरता स्तर कहीं न कहीं हमारे सोचने की क्षमता का भी एक पतन ही है। जहां हम सब राजनीति को मसाल समझ सुन रहे है।भले इसमें हमारा ही क्यों न नुकसान हो।

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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..