Skip to main content

loksabha Election: लोकसभा चुनाव में हुयी कम वोटिंग, जैसे बहुत कुछ बताती है






चुनाव का दिन, मतलब ऑफिस से छुट्टी का दिन। जिस दिन लोग सुकून की नींद ले पाते है। कुछ के लिए इस दिन अपने परिवार के साथ समय बीतना, तो किसी के लिए कहीं घूमने जाने का दिन होता है। जो उनको वोट देने से ज्यादा जरूरी लगता है। 

शायद यहीं कारण है लोकसभा चुनाव की तैयारी चाहे जितने जोर शोर से की गयी हो। किन्तु लोगों को इस तामझाम से अब ज्यादा कुछ मतलब नहीं रह गया है?

 जहां लोगों के लिए चुनाव से ज्यादा जरूरी कुछ और हो गया है। फिर भले क्यों न वो हर पांच साल में आते हो। लोगों को अब ज्यादा जरूरी अपना कुछ पर्सनल काम हो गया है। जहां उनकी सोच ये हो गयी है कि भला देश के लिए वोट देने से उनको क्या ही मिलेगा?
जिनके लिए लोकतंत्र के महापर्व से ज्यादा जरूरी कुछ और हो गया है।


दो चरण में हुयी वोटिंग में हुआ, मतदाताओं का प्रतिशत कम

 अब तक लोकसभा के लिए दो चरणों में  वोटिंग हुयी है जिसमें मतदाताओं के प्रतिशत में कमी देखी गयी है। जो बहुत कुछ बताती है। सभी राजनीतिक पार्टियों  संकेत देती है। कि अगर वो जनता के लिए गंभीर नहीं है। तो जनता से भी वो ये उम्मीद न करें। कि जनता उनके लिए इस भीषण गर्मी में वो वोट देने जाएंगी।
जो केवल चुनाव के वक्त नजर आते है। इसके बाद तो पांच साल तक उनके दर्शन हो जाएं, ये बड़ी बात हो जाती है। 

विज्ञापन की तरह, कागज पर ही सिमट गए मतदाता


अभी आयी हालिया गूगल की रिपोर्ट जैसे बताती है कि अब सारी राजनीतिक पार्टियां विकास पर कम विज्ञापन पर ज्यादा काम कर कर रही है। जहां सबकुछ कागजी तौर पर मौजूद है। फिर धरातल पर क्या हुआ इससे किसी को कोई मतलब नहीं है। 
जिसके चलते अब देश के मतदाता को भी देश के विकास से ज्यादा कुछ मतलब नहीं रह  गया है। जो एक बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट में मौजूद है। फिर वास्तविक तौर पर वो हो या ना हो इससे किस को क्या ही मतलब।




Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..