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Loksabha Election 2024: अब वक्त है हिसाब लेने का



Loksabha Election: हर मांगे जैसे अभी पूरी की जा रही है।  लाईट भी चली जाएं तो वो झट से आ रही है। सब्जी से ले गैस के दाम सस्ते हो गए है। इतनी मेहरबानी क्याें। क्या अब चुनाव  सिर पर है।

चुनाव जो हिसाब मांगता है

वैसे तो चार सालों तक उस जन की कुछ न चलती है । जहां न बात रोजगार की, न व्यापार और न मंहगाई की होती है। जनता वहां अदृश्य सी दिखाई पड़ती है । उसकी परेशानियों से सरकारें आंखे बंद कर लेती है। ये इलेक्शन ही होता है जहां जनता अपने वोट से हिसाब करती है।
 
जो हर जगह से सिर्फ ठगा जाता है

वो जनता जिसे उसके हक भी दान जैसे दिया जाता। बड़े बड़े पोस्टरों में मुस्कुराते चेहरे दिखा, उसे खुश करने की हर सम्भव कोशिश की जाती है। केवल वो ही जानता है कि वो कितना ठगा जाता है। जो जब विवश हो जाता है तब वो सड़को पर धरना देने जाता है।

 
वोट के लिए ही तो जाना जाता है

चुनाव ही तो एक ऐसा समय होता है। जब सिंहासन पर बैठी सरकारों को आम जन की अहमित होती है। वरना क्या हाल उसका, क्या उसकी थाली का?  इससे किसी को जैसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। 

पांच साल का जब हिसाब लेती है

ये चुनाव ही तो होता है। जब जनता को अपने वोट से हिसाब लेना होता है। बीते पांच साल क्या किया? आगे क्या होगा, इसे सोच वोट देना होता है।

एक वोट की कीमत समझ आती है

जनता का एक एक वोट कितना कीमती है ये तब समझ आता है। जब कोई एक वोट से जीतता तो कोई हार जाता है। जहां उसके एक वोट का हिसाब होता है।



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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..