आज भले हम आधुनिकता का ढोंग करते है। जहां हम सबको समान मनाते है। हम लड़का और लड़की के बीच कोई भेद नहीं करते है। किन्तु हमारा दोगलापन उस समय सामने आता है। जब हम किसी को केवल उसके लिंग के आधार पर टिप्पणी करने लगते है। जहां हमारे लिए पहली शर्त ही उसका सुंंदर दिखना है। बाकी सारी चीजें बात की है।
अभी हाल ही का मामला ले लो... जहां एक प्रतिभवान छात्र अपनी बोर्ड की परीक्षा में टॉप करती है। जिसकी तारीफ करने की वजह कुछ लोग उसके चेहरे पर मौजूद बाल पर सवाल उठा ये मजाक करते है कि वो लड़का है या लड़की।
जिस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ जाती है। एक पक्ष उस लड़की के साथ खड़ा हो ये कहता है कि उसके प्रतिभा की सराहना की जानी चाहिये। न कि उसके खूबसूरती पर प्रश्न करना चाहिये। दूसरा पक्ष लग जाता है उसकी कमियां निकलने पर। उसे भला बुरा कहने।
जिसे देख हमें ये साफ नजर आता है कि हमारे देश के लोग भले अपने आप को आधुनिक माने किन्तु उनकी सोच वहीं पुरानी है। जहां उनके लिए एक लड़की का मतलब केवल उसकी खूबसूरती है । जो उसका भविष्य है। फिर चाहे वो कुछ भी करें। कितनी प्रतिभावन क्यों न हो। हमें तो केवल उसकी खूबसूरती से मतलब है। जो हमारी आंखों को अच्छी लगानी चाहिये।
आज के समय में जब हम हर उस पुरानी परम्परा का विरोध कर आगे बढ़ रहे है। जो सादियों से हमारे समाज को निगल रही है। तो फिर हम इस मामले पर क्यों इतना पूर्वाग्रह कर बैठे है? जहां आज भी हम एक लड़की के लिए उसकी खूबसूरती ही सबसे पहले मांगते है। जहां उसका रंग, रूप पर ही सबकुछ हो जाता है।

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