हमें तब ज्यादा हैरान नहीं होना चाहिए। जब कोई बच्चा अपने अपरहण की झूठी खबर बना सबको मूर्ख बनाने की कोशिश करता है ∣
न ही उस बच्चे पर इतना ज्यादा गुस्सा होना चाहिए क्योंकि कहीं न कहीं उस सब के पीछे हम ही जिम्मेदार है ∣
जहां हमने उस बच्चे पर एग्जाम का इस तरह से बोझ डाला है कि वो इसे खुद के विकास के लिए जरूरी नहीं समझ केवल एक मजबूरी मान उसे करता है ∣
जब इस चीज से वो उबने लगता है तब वो अपने अपहरण जैसी झूठी कहानी रच किसी एग्जाम से अपना पीछा छुटाता है ∣

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