जब हम अनुभव करते है तब सीखने की ओर बढ़ते है
कितना भी कह दे हम कि हमने भी ऐसा होते देखा है। उसके बारे में हम ऐसा ही सुनते आएं है। लेकिन जब हम उसे खुद करते है उसके स्वाद को चखते है । कड़वे और मीठे अनुभव को ग्रहण करते है। तब हम सीखते है।
हम सब की जिंदगी का ये कड़वा सच है कि जितना हम सब चीजों को देखकर और सुनकर नहीं सीखते है उतना हम उसे करके सीखते है। जब हम किसी चीज को करते है उसके अच्छे बुरे अनुभवों को हम ग्रहण करते है। वास्तविक रुप में हम तब कोई चीज सीखते है।
ये सब कहने की बाते है कि हमने दुनिया को देखा और सुना है। असल में जब हम उसे करते है। तब हम उसे समझ पाते है। जिस तरह से देखकर किसी चीज की दूरी नहीं मापी जा सकती है। ठीक उसी तरह जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता बिना उसे करें नहीं पायी जा सकती है।
ये सब कहने की बाते है कि हमने दुनिया को देखा और सुना है। असल में जब हम उसे करते है। तब हम उसे समझ पाते है। जिस तरह से देखकर किसी चीज की दूरी नहीं मापी जा सकती है। ठीक उसी तरह जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता बिना उसे करें नहीं पायी जा सकती है।

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