एक समय के बाद हम जिंदगी (Life) में आगे बढ़ने के चक्कर में ये भूल ही जाते है। कि हम भी कुछ है। हमारी अपनी भी कोई जिंदगी है। जहां सबकुछ पाने की लालसा में हम खुद ( Self) को ही कहीं खो बैठते है।
जब हम ये महसूस कर पाते है। कि धीरे -धीरे हम खुद को कहीं खो सा रहे है। तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इस बीच ये त्यौहार ही होते है जो जैसे हमें बताते है। कि जिंदगी में हमारे और भी कई चीजें है। जो हमारे जीवन में उतना ही महत्व रखती है।
भागदौड़ भरी जिंदगी की में जहां हम अपनी खुशी ,चैन खो खुद को एक मशीन बना लेते है। ये त्यौहार ही तो है। जो हमें जीवन में एक पल के लिए ठहराव दे जाते है।
ये त्यौहार ही है जो हमें अपनों की कीमत समझाते है।
''अफसोस जब हम इसकी कीमत समझते है। तब हम कहीं दूर निकल जाते है''।
जहां हमारे पास खेद के अलावा कुछ और नहीं रह जाता है। कि काश हम अपनी पेशेवर जिंदगी के अलावा अपनी व्यक्तिगत जिंदगी को भी थोड़ा वक्त दे पाते।
इससे पहले और देर हो क्यों न हम रिश्तों और अपनों कीमत को समझें। जो हमें हमारे होने का अहसास करते है।

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