Say sorry to the World of Masks: मुखौटो की दुनिया से कहे का मलाल




आज का जमाना वो है ∣ जहां इंसान भले अपनी लाख झूठी तारीफ सुन ले। लेकिन सच सुनकर वो चौक उठता है ∣ क ई बार तो नौबत यहां तक की आ जाती है कि वो इंसान से दूर होने लगता है। 
आज जमाना झूठो का है ∣ जहां सच बोलने वाला अकेला मुखौटा लेकर चलने वाला ही होशियार कहलाता है ∣
जो कब अपना मन बदल ले किसी को कुछ पता नहीं लगता है । 
आज जमाना वो है जहां झूठ बिकता सच हर उस जगह दफनाया जाता है ∣ जहां बोलना जरूरी था। इसके बावजूद जो सच कहने और बिना किसी मुखौटे के दुनिया के सामने आ जाएं वो हर जगह से सिर्फ लूटा ही जाता है ∣ 
आज जमाना वो है जहां इंसान मुखौटे की आड़ में अपने हर उस स्वार्थ का पूरा कर लेता है ∣ जिसे वो अपने वास्तविक रूप में नहीं कर सकता है ∣ 
ऐसे में भला हम आज किस चीज का बुरा माने जहां हर चीज ही झूठ पर टिकी है ∣
जहां व्यक्ति के चेहरे के पीछे अनगिनत मुखौटे है । 
 

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