कि तुम मोम न बनकर चिंगारी बन जाना
तुम भोली न बनकर बलशाली बन जाना ।
जहां तुम घर सुबह से रात बेखौफ चल सको
जहां तुम खुद के पैरों पर खड़ी हो सको
जहां तुम भीख नहीं, अपना हक लो
जहां तुम भले न हो सीता
पर तुम काली हो।
जहां तुम घर की इज्जत नहीं
अपना ख्याल रखने वाली हो।
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