प्यार के दुखद रूप को दिखाती है फिल्म 'एक दूजे के लिए'





मोहब्बत पर वैसें तो बहुत सी कहानी कहीं गयी है। जहां देर सबेर कोई न कोई मोड़ उन्हेंं साथ ला ही देता है। 
किन्तु वास्तविक जिंदगी में आज भी मोहब्बत करने के बाद उनके रास्ते आसान नहीं हो पाते है। जहां उन्हें कदम कदम पर अनेक तरह की  परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इसी सच को 1981में आयी मूवीं 'एक दूजे के लिए' दिखाती है। जहां वासु और सपना की कहानी हर किसी को प्रेम के भयानक सच को बताती है। 

 जहां एक तमिल परिवार में रहने वाला लड़का वासु और उत्तर भारतीय लड़की सपना के बीच प्यार परवान चढ़ने लगता है।

 अफसोस पर उन दोनों परिवार में भाषा , संस्कृति के भेद के चलते राजी नहीं होते है। अंत में वो एक शर्त देते है कि अगर वो दोनों एक दूसरे से एक साल तक नहीं मिलते है। वासु हिंदी सीख लेता है। तब दोनों की शादी कर दी जाएंगी।

किन्तु एक साल बीतने के बाद कहानी में एक भयनाक मोड़ आता है। जहां दोनों को गुड़ों के द्वारा पीटा जाता है। सपना वासु अंत में एक ऐसी हालात में मिलते है। जहां दोनो  के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई और चीज नहीं  बचती है।


फिल्म का गीत  'सोलह बरस की बली उम्रर को सलाम' जैसे अंत में दोनों को सलाम करता है।जिंदा तो नहीं पर वो मरते साथ है। जो दर्शकों को सोचने को मजबूर कर देता है।

Comments