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एक दिन में नहीं मिलती राही को मंजिल



एक दिन में नहीं मिलती राही को मंजिल
उसके लिए उसे हर परिस्थितियों में चलना होता है
लगातार कोशिश करनी होती है बेहतर बनने की
हर पल अपने ऊपर काम करना होता है
कौन कहता है 
एक दिन में मिल जाती है मुसाफिर को मंजिल
इसके लिए उसे लगातार कोशिश करना होता है ∣
जहां कई बार वो हारता है
कई बार उसका जीतना जरुरी होता है 
इसके बावजूद उसे लगातार चलना होता है
जहां उसकी मंजिल आसान हो ये बिल्कुल जरूरी नहीं होता है
पर उसे अपने सपने सच करने  के लिए लगातार कोशिश करना ह़ोता है ∣

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