कहते है कि एक झूठ को अगर हजार बार बोल जाएं तो वो भी सच लगने लगता है। जिसे जैसे आज हम सच मान बैठे है।
जहां एक झूठ को छुपाने के लिए हजारों झूठ बोले जा रहे है।
ऐसे समय में 'भक्षक' जैसी फिल्म हमें मीडिया का मूल धर्म बताने की कोशिश करती नजर आती है।
समाचार और प्रचार में अंतर बताने में सफलता हासिल करती है। जहां वैशाली सिंह जैसी एक पत्रकार दिखाई देती है। जो हर हालात में बालिका गृह में हो रहे अपराध को बाहर लाना चाहती है। जिसके लिए वो अपना सबकुछ न्यौछावर कर देती है।
जहां समाज से लेकर सत्ता हर कोई उसके विरोध में खड़ा है। ऐसे में वैशाली उस अपराध को आम जन के सामने ला पाती है कि नहीं। इसे देखने के लिए फिल्म देखना जरूरी है ∣
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