खेत बिक चुका है खलिहान अभी बाकी है, बरसात बीत चुकी है गर्मी अभी बाकी है किसान तेरा अभी इम्तिहान बाकी है।
यूं तो वो देश का अन्नदाता माना जाता है ∣ जिसके चलते हम दो वक्त की रोटी खा पाते हैं। पर उसे हम उस वक्त भूल जाते हैं। जब वो न्याय की तलाश में हम सब की ओर देख ये सोचता हैं कि हम उनका साथ देगें।
तब हम उसे नजर अंदाज करने की कोशिश करते हैं । हमें लगता है कि हमने उसका कर्ज चुका दिया है ∣ अब हमें क्या मतलब है ∣
ऐसा करते वक्त हम भूल जाते हैं कि हमारी थाली में जो रोटी ओर चावल मौजूद है वो उसके संघर्ष की बदौलत हैं। जिसे हम चाहकर भी पूरा नहीं कर सकते हैं।
आज जब वो सड़कों पर खड़ा न्याय की मांग कर रहा है ∣ तब हमारा ये कर्तव्य बनता है कि अगर हम उसका साथ नहीं दे सकते हैं। तो कम से कम उसके खिलाफ कुछ ऐसा न बोले। जो मानवता को शर्मसार करें।
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