जब कोई जिंदगी से हारता है





आज इंटरनेट की दुनिया में सफलता की ढेरों कहानियां भरी पड़ी है। जहां हर कोई अपने संघर्ष की गाथा बता रहा है।  
जिसे सुन आम इंसान को लगता है। कि वो भी थोड़े संघर्ष के साथ अपने सपने सच कर ही लेगा। इस बीच वो खुद को हर तरह से प्रेरणा देने के लिए इंटरनेट का सहारा लेने लगता है। 
 वो एक ऐसी अंधी दौड़ में चल पड़ता है। जहां उसको खुद के न आदि न अंत का पता होता है

 इस बीच जब उसका सामना दुनिया की प्रतियोगिता से होता है। जहां जब वो खुद को स्थापित करने की कोशिश करता है। तब धीरे धीरे उसका विश्वास खुद से कम होने लगता है।
इस बीच समाज का स्टेटस बनाने की जिम्मा उसके तनाव को कम नहीं करता है। जहां कितना भी कर लो काफी  नहीं है।
जो इंसान को तोड़ कर रख देता है। जहां उसे लगता है कि उसकी जिंदगी अब खत्म हो जाएंगी। उसका खुद पर नियत्रंण कम सा हो रहा है।
इस बीच जो कुछ लोग खुद को सम्भाल लेते है तो कुछ भीड़ में खुद को खो देते है। अफसोस एक समय के बाद उन्हें अपनी जिंदगी खत्म करने के अलावा कोई चारा ही नहीं नजर आता है। जब वो जिंदगी से हार जाते है।


इसे शायद रोक जा सकता था। जहां हम उसे ये बताते कि प्रतियोगिता को प्रतियोगिता रहने दो। उसे जिंदगी न बनने दो। जिंदगी इसके बाद भी है। खुद को किसी के हाथ का खिलौना नहीं इंसान रहने दो। क्या हुआ तुम्हें ये न मिला कुछ बेहतर होगा। इस उम्मीद को रख तुम आगे चलों।

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