परदा नहीं जब कोई खुदा से



मोहब्बत करना कोई जुर्म नहीं है। वो एक सुंदर अहसास है। जो दो अजनबियों को करीब लाता है।
जो बंधन अग्नि की तरह पवित्र होता है। जब तक उसके पीछे कोई लालच न हो,  न शरीर का और न पैसे का, वो तो केवल एक दूसरे के लिए समर्पण की मांग करता है।

 मोहब्बत करना भले कोई जुर्म नहीं किन्तु समाज की नजरों में ये गलत ही होता है। जहां समाज के नियम कायदें के बीच मोहब्बत को कंलक के अलावा और कुछ नहीं समझा जाता है।
 जहां आज भी मोहब्बत करने के चलते कितनी लड़कियां अनारकली की तरह इस दुनिया से अलविदा कर दी जाती है। उनकी केवल इतनी गलती है कि वो मोहब्बत करने का गुनाह कर बैठती है।
जिसकी सजा उन्हें 'ऑनर किलिंग' के रुप में मिलती है। 
जो समाज के ठेकेदार भले उन सभी अपराधों पर अंधे हो जाते है। जब दहेज की मांग के चलते किसी लड़की को जिंदा जला दिया जाता है। जब कोई लड़का झूठे केस में फंसा दिया जाता है। तब ये लोग शांत बैठते है। 

इन्हें तो केवल तब बुरा लगता है। जब कोई प्यार करने का गुनाह करता है। 

पर कहते है न मोहब्बत दिल से की जाती है । जो किसी भी तरह की सीमा से मुक्त होता है। जो प्रकृति से किसी तरह से छिपा हुआ नहीं है। सबकुछ उसके समक्ष पारदर्शी है। तब समाज के ठेकेदारों से डरने का क्या मतलब है। मोहब्बत की है कोई चोरी नहीं की है ∣ 

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