Skip to main content

परदा नहीं जब कोई खुदा से



मोहब्बत करना कोई जुर्म नहीं है। वो एक सुंदर अहसास है। जो दो अजनबियों को करीब लाता है।
जो बंधन अग्नि की तरह पवित्र होता है। जब तक उसके पीछे कोई लालच न हो,  न शरीर का और न पैसे का, वो तो केवल एक दूसरे के लिए समर्पण की मांग करता है।

 मोहब्बत करना भले कोई जुर्म नहीं किन्तु समाज की नजरों में ये गलत ही होता है। जहां समाज के नियम कायदें के बीच मोहब्बत को कंलक के अलावा और कुछ नहीं समझा जाता है।
 जहां आज भी मोहब्बत करने के चलते कितनी लड़कियां अनारकली की तरह इस दुनिया से अलविदा कर दी जाती है। उनकी केवल इतनी गलती है कि वो मोहब्बत करने का गुनाह कर बैठती है।
जिसकी सजा उन्हें 'ऑनर किलिंग' के रुप में मिलती है। 
जो समाज के ठेकेदार भले उन सभी अपराधों पर अंधे हो जाते है। जब दहेज की मांग के चलते किसी लड़की को जिंदा जला दिया जाता है। जब कोई लड़का झूठे केस में फंसा दिया जाता है। तब ये लोग शांत बैठते है। 

इन्हें तो केवल तब बुरा लगता है। जब कोई प्यार करने का गुनाह करता है। 

पर कहते है न मोहब्बत दिल से की जाती है । जो किसी भी तरह की सीमा से मुक्त होता है। जो प्रकृति से किसी तरह से छिपा हुआ नहीं है। सबकुछ उसके समक्ष पारदर्शी है। तब समाज के ठेकेदारों से डरने का क्या मतलब है। मोहब्बत की है कोई चोरी नहीं की है ∣ 

Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..