फिर प्रलय न आएं




                         आधुनिकता की अंधी दौड़ में

भूल न जाना तुम
जो प्रकृति तुम्हें इतना दे सकती है
वो अति होने पर तुम से सबकुछ ले भी सकती है। 
प्रकृति जो तुम पर अपना सबकुछ न्यौछावर कर सकती है
वो तुम से सबकुछ छिन भी सकती है
जो प्रकृति तुमको बेहतर जिंदगी देती है
वो तुम्हारी जिंदगी को बंजर भी कर सकती है
उससे खिलवाड़ करने की तुम कोशिश भी न करना
वरना वो तुमको जला कर खाका भी कर सकती है। 

 

 


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