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Why is there no debate on women's safety even today?

क्यों आज भी महिलाओं की सुरक्षा बहस का मुद्दा नहीं

बीएचयू में हुई घटना जैसे एक बार फिर  महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्व खड़ा करती है । जो हम सब को सोचने को मजबूर करती है। कि क्या वास्तव में आज भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकारें संवेदनशील हुई है?
 यह फिर केवल सुर्खियों बटोरने के लिए 'बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं' का नारा दिया जा रहा है। जो न आज अपने घर में न बाहर  सुरक्षित है ।

वहीं दूसरी ओर चयनित मत्ताधिकारी इस विषय का समाधान निकालने की बजाएं गलत काम करने वालों का पक्ष लेते हुए ये कहते दिखाई देते है कि लड़के है गलतियां कर देते है। 
जिसमें वो लड़कियों को ही दोष देने लगते है कि इतने छोटे कपड़े पहनेगी तो ये ही होगा न। 

ऐसा बोलते वक्त वो ये भूल जाते है कि हम उस देश में रह रहे है जहां 6 महीने से 60 साल तक की बूढ़ी औरत के रेप होते है। 

क्या सिर्फ उनके कपड़ो को देखकर उनके साथ गलत होने को सही ठहराया जा सकता है। जहां नजरों किसी और की खराब और चश्मा किसी और को पहनने को कहा जा रहा है।

अब समय आ गया है कि हम भारत के संविधान की प्रस्तावना 'हम भारत के लोग' की पंक्ति की भावना का अर्थ समझें। जहां महिलाएं भी इस देश की नागरिक है। उनके अधिकारों को जानें।

मजेदार लगने वाली डिबेट को छोड़ उस विषय को बहस का मुद्दा बनाएं जो हमारे अपने हित से जुड़ा है। जिससे कल को किसी ओर की बेटी के साथ ऐसा कोई गलत काम  न हो। जो उनकी जिंदगी खराब कर दें।
ये तब ही सम्भव होगा जब हम मोमबत्ती जलाना छोड़ सरकार और न्याय प्रणाली को इतना मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे। जिससे कोई ऐसा गलत काम करने से दस बार सोचे।

इसके लिए हमारे समाज को भी महिलाओं के लिए संवेदनशील होना होगा। उन्हें इंसान समझने की कोशिश करनी होगी।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..