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वतन से रवानगी और वापसी की चाह को दिखाती है 'डंकी' मूवी



आज से नहीं बल्कि बरसों से लोगों का विदेश जाने का सपना रहा है। जहां हर कोई अमेरिका जाना चाहता है।
जहां पहुंचने के दो तरीके है पहला वीसा लेकर । जिसके  लिए इंग्लिश आना जरुरी है। वहीं दूसरा अवैध रूप से जाना है  जिसे 'डंकी' के नाम से जाना जाता है।

इसी अवैध रुप से पंजाब के गरीब लोगों का विदेश जाने के संघर्ष को निर्देशक राजकुमारी हिरानी ने अपनी फिल्म 'डंकी' में दिखाया है। जिसमें चार दोस्तों की कहानी को बताया गया है जो लंदन जाना चाहते है। जिसमें  उनकी मदद पूर्व आर्मी मैन हार्डी करता है। ऐसे में ये पूरी फिल्म में वो दोस्त किस तरह से लंदन जाते है वो फिल्म में देखना काफी दिलचस्प होता है।

जो कभी हमें हंसाती है कभी रुलाती है। इस बीच हार्डी और पन्नू की मोहब्बत हमें उसके सच्चे मायने बताती है। हालांकि हार्डी ने पन्नू के  लिए 25 साल रुकने का क्यों फैसाला किया। इसका कोई वाजिब कारण पन्नू की एक्टिंग में हमें दिखाई नहीं देता है। 
 
इस फिल्म को क्यों देखा जाना चाहिए ?

तो इसका उत्तर है कि इस फिल्म में हम विदेश जाने के उस काले सच को देखते है जो अक्सर हम से छिपा दिए जाते है। वो भले विदेश  में कोई छोटा काम ही कर रहें होगें। किन्तुु वतन तक उसका केवल आकर्षण ही पहुंचता है। जिसे देख कई और लोग विदेश जाने का ख्वाब अपनी आंखों में रखते है। बिना ये जानें की उसके पीछे की दुनिया कितनी संघर्षपूर्ण है।

 वहीं इसकी कहानी दर्शकों को कहीं कहीं भावुक करते नजर आती है। जहां जावेद अख्तार का गान 'निकले हम घर से' और जावेद अली का गान 'चल वे वतना' हमारे रोमटे खड़े कर देता है। 
वहीं फिल्म का कोर्टरूम वाले दृश्य में हिरानी सामाजिक और राजनीतिक कथन को दमदार रुप से रखते है।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..