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राम पर कुंवर नारायण की कविता पढ़ी जानी चाहिए

राम जो आस्था, विन्रमता का एक रूप है ∣ राम नाम न सिर्फ इंसान अपने जीते बल्कि मुक्ति के लिए करता प्रयोग है ∣ जब वो इस दुनिया को छोड़ आगे निकलता है तब उसकी मुत्यु पर 'राम नाम सत्य है' का एक नारा सा लगता है। 
जो शिव की तरह ही सत्य और सुंदर है ∣ जिसके लिए हर कोई समान है ∣ 
आज जब उस राम के नाम पर कही वोट , तो कहीं अपनी ताकत का प्रभुत्व दिखाया जा रहा है ∣  जहां आज राम के नाम पर राजनीति चरम पर है ∣  जहां राम नाम से भी ऊपर देश का कोई नेता है ∣ 

ऐसे समय में कुंवर नारायण की उस कविता का सारांश समझे जानें की जरूरत है ∣ जो हमें आज की वास्तविकता को दिखाती है ∣

जहां कुंवर नारायण अपनी कविता में कहते हैं कि दुनिया का कड़वा सत्य हमारा जीवन है ∣ जहां इंसान अनेक तरह की चुनौतियों का सामना करता है ∣ जहां सुख और दुख का आना लगा ही रहता है ∣  जबकि राम एक महाकाव्य है ∣ जिसके अनेकों सर्ग है ∣ जिसे समझने के लिए व्यक्ति को थोड़ा वक्त चाहिए। 

जहां आज उस राम की लड़ाई 1० सिर वाले रावण से नहीं बल्कि करोड़ों अविवेकी लोगों से है जिन्हें धर्म के मुद्दे पर कभी भी लड़ाया जा सकता है ∣ तो कभी अंधविश्वास के नाम पर उनका शोषण किया जा सकता है ∣ जहां उन्हें लूट कर ही उनके पैसे दिए जाते हैं ∣

जहां आज का विभाषण किनके साथ है ∣ किसी को भी पता नहीं है ∣
जो राम धरती के कण कण में बसते है ∣ वो अब एक विवदित जगह पर सिमट कर रह गए हैं ∣

जहां अब अयोध्या सिर्फ अध्योध्या नहीं बल्कि युद्धोंओ की एक लंका बन गयी है ∣ जहां तुम्हारे नाम का उपयोग चुनाव के प्रचार के लिए किया जा रहा है ∣
जिससे कहीं बेहतर  तुम्हारा त्रेता युग है‌। जहां आज युग मर्यादा पुरुषोत्तम राम का नहीं बल्कि असल में है नेता युग। जहां कोई नेता दूसरों के काम को अपने श्रेय में दे दुनिया को बताने मे लगा है उससे बेहतर कोई नहीं है। 


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..