जो की जाती है
परिवार, समाज के द्वारा
जहां किसी को उसके जीवन का
अंतिम लक्ष्य केवल एग्जाम
पास करना करार कर दिया जाता है।
फिर चाहे खुद हो उसे पास
करने की इच्छा या न
एक जिंदा इंसान को लाश
बनाने की कोशिश में हर कोई लग जाता है।
जिसमें वो सब जिम्मेदार है
जो उसे ये अहसास करते है
कि ये एग्जाम ही उसकी दुनिया है
जो उसे तनाव की दुनिया में ले जाता है।
जो सफल हो जाता है वो
इस दुनिया में
अपना नाम बनाता है
जो हार जाता है
वो इस दुनिया से कहीं गुमनाम हो जाता है।
जो असफलता उसे हर तरह से हारा देती है
जो उसे अपने पर विश्वास करना भूला देती है
कुछ नंबरों पर निर्भर उसकी जिंदगी हो जाती है
जो उसे भीड़ में भी अलग खड़ा कर देती है।
आसान नहीं होता है
एक प्रतियोगी परीक्षा को पास करना
जहां जैसे आर या पार की लड़ाई होती है।
जो उसे धीरे धीरे खत्म कर देती है
जो थोड़ी बहुत उम्मीद उसे होती है
वो तब खत्म हो जाती है
जब उसे ये चुनौती मिलती है
किसी भी हाल में उसे ये एग्जाम पास करना है।
जहां से उसकी जीने की इच्छा
धीरे धीरे खत्म होती है
जहां वो आत्महत्या करता नहीं
बल्कि उसकी हत्या
उन सब लोगों के द्वारा होती है
जो उसे झूठे सपने दिखाते है
एक बार एग्जाम पास कर लोगे
तो दुनिया तुम्हारे कदम चूमेगी
जो उसे जिंदगी का असली अर्थ नहीं बताते है
जहां कदम पर कदम पर फूल और कांटे
है।

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