आज जहां पूरा भारत राम की धुन मे राममय हो रहा है ∣ हर कोई उनकी छवि देखने को आतुर हो रहा है ∣ ऐसे में ये जान लेना बहुत ही आवश्यक है कि आखिर कौन है राम?
वाल्मीकि की रामायण के अनुसार,
जब अयोध्या के सूर्यवंशी राजा दशरथ को संतान प्राप्ति नहीं हुई तब सम्राट दशरथ ने पुत्र प्राप्ती यज्ञ कराया। जिसके फलस्वरूप उनके पुत्रों का जन्म हुआ। श्रीराम चारों भाइयों में सबसे बड़े थे। हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को 'राम नवमी' का पर्व मनाया जाता है ∣ जो कि संस्कृत महाकाव्य रामायण में भी वर्णित है।
जबकि कुछ हिंदू ग्रंथों में, राम के बारे में कहा गया है कि वे त्रेता युग में रहते थे।
वहीं पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक राम भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। श्रीराम का जन्म त्रेता युग में हुआ था । उन्होंने करीब 11000 वर्ष अयोध्या का शासन किया था ।
उन्हें अपने बाल्यकाल में मानव जाति के कल्याण के लिए अनेक ऐसे काम किए । जहां राम अपने गुरु विश्वामित्र के साथ यज्ञ की रक्षा के लिए छोटे भाई लक्ष्मण के साथ मिल ताड़का जैसे कई राक्षस का वंध किया। उसके बाद राम गुरु के साथ राजा जनक के यहां उनकी पुत्री सीता के स्वयंवर में पहुंच कर शिव के धनुष को तोड़ सीता से विवाह किया।
जब राम को अगला राजा बनाया जा रहा था। तब उनके पिता के वचन के लिए 14 वर्ष वनवास जाना हुआ। जहां पर लक्ष्मण ने शुर्पनखा के नाक कान काट दिए । तब माता सीता का अपहरण रावण द्वारा किया गया। जिसकी खोज में जटायु पक्षी जो बात करता था। जिसने रावण का प्रतिकार किया था । राम ने उनका अपने पिता के समान अंत्येष्ठि संस्कार किया। आगे वो हनुमान, सुग्रीव से मिले। राम की सहायता से सुग्रीव ने अपने अत्याचारी भाई बाली का वध कर वहां का राजा बने। हनुमान ने माता सीता की खोज की रावण के भाई विभीषण को शरण दी । राम ने युद्ध में रावण और इसके 1लाख से अधिक पुत्र डेढ़ लाख से अधिक पौत्र को कुंभकरण ,मेघनाद सहित मार गिराए साथ ही रामेश्वर में शिवलिंग स्थापित किये । जो की ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध हैं। नवरात्रि शक्ति की पूजा की समुद्र पर पुल बनाया और रावण को विभीषण के द्वारा अबताए रहस्य से जान कर मार गिराया। राम पुष्पक विमान ले माता सीता को अग्नि परीक्षा करा लेकर शीघ्र भरत भैया के पास अयोध्या पहुंचे।
अन्य जानकारी
- वाल्मीकि ने रामायण की रचना की थी।
- गोस्वामी तुलसीदास ने उनके जीवन पर केन्द्रित महाकाव्य 'रामचरितमानस' की रचना की थी।
- इसके अलावा भारतीय भाषाओं में भी रामायण की रचनाएँ हुई हैं, जिनमें स्वामी करपात्री ने रामायण मीमांसा में विश्व की समस्त रामायण का लेखा हैं ।
- दक्षिण के क्रांतिकारी पेरियार रामास्वामी व ललई सिंह की रामायण भी मान्यताप्राप्त है।

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