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क्या सहनशीलता का टेका सिर्फ उसने ले रखा है



इसे समय की विंडम्बना कहें या समाज का दोगलापन। पर बरसों से हम सब एक ऐसी चीज का पालन करते आ रहे है। जिसने एक वर्ग को बहुत ज्यादा शक्ति दूसरे को बहुत ज्यादा कमजोर कर दिया है। जिसके चलते समाज में असंतुलन की स्थिति पैदा हो गयी है।
जहां महिला वर्ग को सहनशीलता की मूर्ति बन उन पर अत्याचार की सारी हदें पार की जाती है।  जिसके बचाव में सिर्फ ये कह दिया जाता है। कि लड़की है इतना तो सहना ही होगा। 
वहीं दूसरे को इससे बचाव के लिए तनाव रख दिया जाता है।

ऐसा करते वक्त हम ये भूल जाते है कि जब यहीं चीज सीमा पार कर दी जाती है तब वो अपराध बनने में देरी नहीं लगती है।

आएं दिन की खबरें जब हम पढ़ते तो मालूम चलता है कि आज भी पुरुष वर्ग के द्वारा महिला के साथ कितनी क्रूरता की जाती है। 
जहां कभी पति से पैसे मांगने के चक्कर में उन्हें पुरुष की हिंसा का सामना करना पड़ता है। कहीं चरित्र में शक के चलते उनको उनके परिवार के लोगों के द्वारा मौत के घाट उतार दिया जाता है।
जो सबके लिए सबसे सॉफ्ट टारगेट हो जाती है। इतने सब के बावजूद स्रब बरताने की घूंटी उस स्त्री को ही पिलाई जाती है। कि घर को बनाएं रखने का जिम्मा उसके सिर पर है।
ऐसा बोलते वक्त हम ये भूल जाते है कि एक महिला भी अपने जीवन काल में शारीरिक , मानसिक तनाव झेलती है। इसके बावजूद शांत रहती है। किन्तु अफसोस उसे बदले सिर्फ आज भी किसी न किसी की हिंसा का सामना कई बार करना पड़ता है।
वो सिर्फ इस मिथक को बनाएं रखने के लिए की शरीफ घर की लड़कियां ज्यादा बोला नहीं करती है । वो ज्यादा आक्रामक नहीं होती है। वो घर की इज्जत होती है। उसे घर की एक मान मर्यादा बनाएं रखने की जरुरत होती है।


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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..