उस अंतिम ऊंचाई तक पहुंचने से पहले


जब हम हम असफल होते है


जीवन के किसी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को निरंतर प्रयास कर संघर्ष की आग में जलना पड़ता है। इसके बावजूद सफलता मिले ये अक्सर जरुरी नहीं होता है।

हम सब के जीवन में एक पल ऐसा जरुर आता है। जहां हम सब उस जगह पर खड़े होते है। जिसके एक तरफ हमारा ख्वाब दूसरी तरफ अपने सपनों का टूटना होता है। जहां केवल समय ही जानता है कि आखिर हमारे जीवन का अगला मोड़ अब कहां है?


जहां हमारे मन में खौफ सौ प्रतिशत होता है। जिसके लिए हमने अपनी जिंदगी का बहुत वक्त दिया होता है।

जो लोग कहते है न कि कितना वक्त ही बिता होगा। उन्हें कौन समझाएं देखते ही देखते हमारा साल दर साल उठता एक जनाजा सा है।

जिस सरकारी नौकारी के लिए हम सब भाग रहे है। उसका सच बड़ा ही कड़वा सा होता है। जहां केवल फेल और पास होने के बीच लटका हमारा जीवन होता है।

जहां रिजल्ट आने पर केवल वहीं सामने आते है जो पास हो जाते है। बाकी तो अंधकार के गर्त में कहीं पीछे छूट जाते है।

जिनके बारे में हमें जानने में कोई दिलचस्प नहीं होती है। 

इसी बीच जो थोड़ा बहुत आत्मविश्वास अपने पास रखते है वो उस वक्त बिखर जाते है। जब उनकी किताबों को बोझ, पढ़ाई को उनकी मुसीबत मान लिया जाता है।

उस अंतिम ऊंचाई पर पहुंचने से पहले कई फूल मुरझा जाते हैं। कई दिशाहीन बन जाते हैं ∣ कई तो बस निशाना छोड़ जाते हैं ∣ 

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