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आज के समय में सावित्रीबाई का होना




एक तरफ आज महिलां पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिला आगे बढ़ रही है। जहां ऐसा शायद ही कोई क्षेत्र होगा। जहां महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज न करायी होगी। 

वहीं दूसरी तरफ इस बात से भी नहीं नकारा जा सकता है कि आज पहले की तुलना में उनके साथ अपराधों की संख्या में  लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।

जहां कहीं लिंग के नाम पर उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। तो कहीं उनके ज्यादा आत्मनिर्भर होने में प्रश्न उठाया जा रहा है। जो उनको आज भी कई बेड़ियों में जकड़े हुए है। 

इसके चलते आज हमारे देश में सावित्री का होना जरुरी है। हालांकि इस बात से नकारा नहीं जा सकता है कि हर कोई सावित्री को चाहता तो है। पर अपने घर में नहीं। जो सोच आज बदलने की जरुरत है। 
ऐसा तब ही सम्भव होगा जब हम उनको कोई वस्तु न मानकर इंसान समझेंगे। 

जो महिलाओं को उनके हक के बारे में बताएंगी।उन्हें वो ग्रंथ के बारे में बताएंगी जो उनके उद्धार की बातें करता है। उस झूठ से परदा उठाएगी जो उनको बोझ बनाएं रखें है।
ये तब ही सम्भव होगा जब महिलाएं खुद को खूबसूरती के तराजू में न तौलकर अपने होने का बोध करेंगी।
जहां वो ये समझेगी कि उनके पास असीम ताकत है जिसका उपयोग कर वो खुद को बेहतर बना सकती है।
इस लिए हमारे समाज में ज्योतिबाफुले जैसे पुरुषों का होना जरुरी है। जो उनकी इसमें मदद कर सके।
जो हमारे समाज में मौजूद तो है किन्तु बहुत सीमित संख्या में । जिसके चलते बुराई का प्रभुत्व आज ज्यादा बन चुका है। जिसे दूर करने की आवश्यकता है।

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