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आज आजादी के 70 साल के बाद भी हमारे देश में ऐसी बहुत सी बुराईयां है। जो समाज के एक वर्ग को अपनी बेंड़ियों में जकड़े हुए है। जिसमें शिक्षित अशिक्षित सब एक बराबर है।
जो सिर्फ एक लड़की के चरित्र को खराब करने की कोशिश में आस पड़ोस से लेकर रिश्तेदार सहकर्मी सब लाईन में लगे रहते है।
वो लड़की अगर उनके नियमों के अनुुसार चले, तो ठीक है।वरना वो उस लड़की को समाज का सबसे बुरा इंसान बनाने की कोशिश करते है।
जब वो लड़की उन से आगे निकल जाती है। तब वो सोशल मीडिया जैसे प्लेटफार्म का उपयोग कर, उस लड़की के व्यक्तिगत फोटो को डालकर दुनिया के सामने उस चरित्रहीन साबित करने की कोशिश में लग जाते है।
जिसमें कुछ लड़किया इस तरह की परेशानियों से निकलकर आगे बढ़ जाती है। जबकि कुछ लड़कियां टूट जाती है।
आज भले हम कितनी भी बड़ी- बड़ी बातें करें। पर सच्चाई यहीं है कि आज जो पेशेवर महिलाएं नये मुकाम हासिल करने की कोशिश कर रही है।
उनको उनके सहकर्मियों के द्वारा बार बार ये अहसास कराया जा रहा है । कि वो चाहे कितनी भी प्रतिभावान हो वो रहेगी । उनके पैरों की जूती ही है।
जिस पर अमृता प्रीतम का वाक्य सही सा लगता है कि भारतीय पुरुष वर्ग एक बुद्धिमान स्त्री की इज्जत करना नहीं जानता है।
जिनका चरित्र प्रमाण पत्र बनाने की पूरी जिम्मेदारी उस मानसिकता से भरे लोगों की होती है।
आज ही मामला ले लो। जब एक चर्चित पत्रकार के द्वारा एक प्रतिष्ठित एंकर की निजी फोटो को सोशल मीडिया में अपलोड कर उनके चरित्र पर उगुली उठाने की कोशिश की जाती है।
जैसे उनको इस चीज का लायसेंस मिल गया हो।
जैसे उनको इस चीज का लायसेंस मिल गया हो।
हालंकि ये सिर्फ लड़कियों के साथ नहीं बल्कि लड़को के साथ भी हो रहा है। जहां उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता है। जिसे कोई भी पेशा अछूता हुआ नहीं है।

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