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हर दिल अपनी मर्जी से धड़कने दो


आज के समय में जहां हर चीज सिर्फ फायदे के लिए ही की जाती है ∣ फिर चाहें बात रिश्ता निभाने की ही क्यों न हो। 
ऐसे में 'दिल धड़कने दो' मूवी हम सब को जिंदगी के प्रति एक अलग सा नजरिया देती है ∣


जो की फैमिली ड्रामा है ∣ जिसकी कहानी अमीर वर्ग की परेशानी को केन्द्र में रखकर बनायी गयी है ∣
जहां पर मेहरा की फैमिली को बताया गया है ∣ जिनकी एक इंडिपेंडेंट बेटी आईशा और एक बेटा कबीर है । जो दोनों अपनी आजादी को जीना चाहते हैं। 
जहां आईशा अपने पति मानव से खुश नहीं है वो उससे तलाक़ लेने की कोशिश में है ∣
वहीं मेहरा परिवार का एकलौता वारिस कबीर अपने आप को पिता की कंपनी के लायक  नहीं समझता है। 
ऐसे में किस तरह से मेहरा फैमिली अपने बच्चों को सही राह दे पाती है ∣ 
उनके दिल की धड़कनों को किसी ओर की धड़कने बनने से रोक पाती है ∣ ये देखना फिल्म में बड़ा ही दिलचस्प होता है । 

जो हमें जीवन जीने का एक तरीका सिखाती है ∣ जहां हर किसी को अपनी इच्छा के मुताबिक जीने का हक है। 
जब दो लोग एक दूसरे से प्रेम करें। तब वो एक दूसरे को उनकी तरह जीने की भी स्वतंत्रता दें। 



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Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..