सिर्फ मैं हूँ का जब अहम सिर में चढ़ता है




वैसे तो हम सब किसी न किसी न काल्पनिक दुनिया में ही अपना जीवन जी रहे होते हैं ∣ किन्तु हम उस समय ज्यादा  काल्पनिक हो चुके होते हैं ∣ जब हमें लगता है कि हमारे रहने से ही ये दुनिया चल रही है ∣
अपनी इस गलतफहमी में हम लोग भूल जाते हैं ∣ कि ये दुनिया किसी के लिए नहीं रूकती है ∣ ये चलती जाती है ∣ 
 बात सिर्फ इतनी सी है जब तक हमें उनसे काम रहता है ∣ तब तक उनकी गलतफहमी हम बनाएं रखते हैं ∣

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