जब बात अंधकार के बीच प्रकाश की हो


आज के समय में जब इंसान आगे बढ़ने के बारे में सोचता है ∣ तब उसे लगता है कि सबकुछ आसान हो जाएगा। बिना कष्ट झेले ही वो जिंदगी में आगे बढ़ जाएगा। ऐसा सोचते वक्त वो ये भूल जाता है कि जिंदगी में कोई भी चीज यू ही नहीं मिलती है। हर चीज की कीमत अदा करनी पड़ती है ∣ बिना दर्द झेले कोई भी चीज नहीं मिलती है ∣
अब बात दीपक की ही ले लो
जो अपने सृजन में कितने कष्ट झेलता है ∣  इसके बाद जब वो भट्टी में पकता है ∣ तब जाकर वो एक मजबूत दीपक का आकार ले पाता है ∣ 
फिर हम इंसान कैसे सोच लेते हैं कि हमें सबकुछ बिना मेहनत के ही मिल जाएगा। 



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