जब मैं ही सबकुछ होने लगता हूँ तब मैं डरता हूं




जब मैं ही सबकुछ होने लगता हूँ तब मैं डरता हूं
जब मैं खुद को ही सबकुछ समझने लगता हूं तब मैं डरता हूं। 

अक्सर आगे बढ़ने का मतलब
जब मैं स्वयं को समझने लगता हूं
उस समय में दिशा हीन होकर चलता हूं
जब हमें लगने लगता है कि 
सिर्फ मैं ही हूं जो सबकुछ जानता हूं
ये दुनिया क्या जानें
मैं ही हूं जो समय को अपने
कब्जे में करे रहता हूं
सिर्फ मैं ही हूं जो सबकुछ कर सकता हूं
मेरे अलावा भला कोई कुछ कर पाता है
मैं ही जब हमको 
इस चीज का गर्व होता है
तब इंसान गिरने लगता है
तब वो गलतियां करने की ओर बढ़ता है
सिर्फ मैं ही हूं
जब इंसान सोच आगे बढ़ता है ∣

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