बहुत कुछ कहती है 'नरगिस मोहम्मदी' की कहानी


वैसे तो जीवन  में हर इंसान कभी न कभी संघर्ष करता है किन्तु जब वो संघर्ष अपने लिए न होकर किसी ओर के लिए हो जाएं तब वो महान हो जाता है।

एक ऐसा ही संघर्ष शांति नोबेल पुरस्कार लेने वाली नरगिस मोहम्मदी की कहानी कहता है। जिन्होंने ने उस देश में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठायी जहां उनकी जिंदगी सबसे ज्यादा मुश्किल भरी हुई है।
अभी पिछले वर्ष ईरान में  महसा अमिनी के समर्थन में चले विरोध को कैसे भूला जा सकता है । जिनकी संदेहास्पद मौत को लेकर ईरान की सड़कों पर महिलाओं ने बडा भरी आंदोलन किया था। 
वहीं जब बात नरगिस की आती है तब हम देखते है कि पेशेवर रूप से एक पत्रकार रहने वाली नरगिस ने  महिलाओं के अधिकारों के लिए आवाज उठायी। 
ये जानते हुए कि इसके चलते वो जेल भी जा सकती है किन्तु उन्होंने लिखाना बोलना नहीं छोड़ा वो अपनी कलाम चलाती रही।
ये समय की बड़ी विंडम्बना है कि जब उन्हें विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया है तब वो ईरान की खौफनाक जेल में कैद है।
जहां उनके लिए हर रात व्यतीत करना चुनौतीपूर्ण है।
ऐसे में नरगिस की कहानी पूरे विश्व को एक संकेत देती है कि अब जमाना बदल चुका है  आज वो जमाना नहीं रहा जब महिलाओं पर अत्याचार होता रहेगा, वो उसका विरोध नहीं करेंगी।
आज जब जब उनके खिलाफ अन्याय होगा तब वो हुंकार भरेगी।

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