जब जुल्म की सारी हदें पार हो जाती है। तब बेजुबान इंसान में भी जुबान आ जाती है।
सीधा से सीधा इंसान उस समय बोलना सीख जाता है जब उसके साथ अत्याचार की सारी हदें पार की जाती है।
अक्सर चीजे जैसी दिखाई देती है वैसी ही हो ये बिल्कुल जरूरी नहीं होता है। उसके पीछा छिपे कई कारण होते है जिसके चलते इंसान इतना बदल जाता है।
इसके बावजूद जब हम बिना सोचे समझे किसी इंसान की भाषा बोली देखकर उसके बारे में गलत धारणा बन लेते है जो हमेशा गलत ही होता है।
हर इंसान की सोच के पीछे उसके आस पास का वातावरण जिम्मेदार होता है जिसके चलते उसके सोचने की क्षमता से लेकर काम करने के तरीके में बदलाव आता है। जो उसकी सोच में दिखाई देता है।
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