Skip to main content

ज्ञानी तो रावण भी था



ज्ञानी तो रावण भी था पर उसकी बुद्धिमानी क्या काम आयी फिर ये इंसान क्या चीज है। 

कहते हैं व्यक्ति का विनाश उस समय शुरू हो जाता है जब उसकी बुद्धि मारी जाती है ∣ उसके पतन की शुरुआत ही उसके सोचने की क्षमता कम होने से शुरू होती है ∣
जब प्रश्न ये खड़ा होता है कि क्या रावण बुद्धिमान नहीं था ? तब बेशक रामायण के माध्यम से हमें मालूम चलता है कि रावण न सिर्फ धनवान बल्कि ज्ञानवान भी था किन्तु उसके गर्व ने उसे इतना अंधा कर दिया कि उसे सही और गलत में फर्क ही नहीं समझ में आया। 
जो उसके पतन का कारण बना। 
अफ़सोस आज के समय में इंसान रावण से भी ज्यादा घमंड करने लगा है ∣ जहां वो थोड़ा सा धन और विद्या पाकर खुद को ज्यादा समझने लगा है ∣ जो उसे अंधा बना रहा है ∣


Comments

Popular posts from this blog

Today Thought

कौन क्या कहता है हमारे बारे ये सोचने में ही हमारा आधा वक्त निकल जाता है।  आधी से ज्यादा लड़ाई केवल इसलिए होती है कि हमारा नजरिया अपने लिए हमेशा सही दूसरों के लिए गलत होता है। भले फिर क्यों औरों की कहानी में हम भी बुरे हो। 

हम शायद भूल गए

खुद को सुनना‌ हम भूल गए हैं खुद को चुनना हमने दूसरों को ही अपना आईना बना लिया है हम भूल गए हैं अपने आप को चुनना हमने चुन लिया है शब्दों को हमने बंद कर दिया है किसी के मौन को समझना हम भूल गए हैं इंसान को समझना हमने चुन लिया है इंसान के शौर को हम ने चुन लिया है इंसान की बकवास को हम नहीं सुनना चाहते नहीं समझना चाहते किसी की  खामोशी को हमने चुन लिया के आज के ढोंग को हम भूल गए हैं किसी के चेहरे के भाव को पढ़ना। 

life real meaning thought

पैसा सबके पास नहीं हो सकता..पर उसे कमाने का मौका सबको मिलता है.. गलतियां स्वीकार करने का हुनर सबके पास नहीं होता है..जिनके पास होता है..वो जीवन में बेहतर करते है.. लोगों का काम है बाते बनाना ये हम पर निर्भर करता है..हम उसे कैसे लेते है.. दुनिया सबकी नहीं हो सकती..कई बार उसे अपने लिए बनाना पड़ता है..