इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वो जो सही नीति का प्रयोग कर हर चीज का चयन करते हैं ∣ दूसरे वो लोग होते हैं जो किसी भी तरह से केवल अपने लक्ष्य को पाना चाहते हैं।
दूसरे तरह के लोग पहले लोगों की तुलना में अक्सर समाज के लिए खतरनाक ही होते हैं ∣
कई बार तो वो इस हद तक उसे पाने की कोशिश में लग जाते हैं कि किसी इंसान का अगर इसमें बुरा भी हो रहा होता है तो जैसे उन्हें कोई फर्क ही नही पड़ता है ∣
आज जब हम दशहरे का त्यौहार मनाने जा रहे हैं तब समझना जरूरी हो जाता है कि कहीं हम खुद भी तो रावण बनने की ओर अग्रसर नहीं हो रहे हैं ∣
जहां हमें रावण की तरह खुद की धन सम्पत्ति पर घमंड सा हो गया है ∣ जहां हम ज्ञानी होकर भी गलतियां करना नहीं छोड़ते है ∣ हम धर्म से अधर्म की ओर जाने की कोशिश कर रहे हैं ∣
अगर हम ध्यान से देखें तो आजकल एक कथन रावण के लिए बड़ा लोगों के बीच प्रसिद्ध है कि " हजारों रावण एक पुतले को जलाने जा रहे हैं ∣"
जो कहीं न कहीं सत्य ही प्रतीत हो रहा है जहां इंसान में इंसानियत शेष नहीं रह गयी है ∣ हर क़ोई केवल अपना हित देखने में लगा है ∣ जहां उसकी कथनी और करनी में जमीन आसमां का फर्क है ∣
जहां वो वैसे तो खुद को बड़ा गुणवान व्यक्ति बताने की कोशिश करता है ∣ पर जब बात उसकी आ जाती है तब वो बदलने सा लगता है। वो नियमों को बदलने में जी जान लगा देता है ∣
वो एक तरफ बड़ा सदाचारी व्यक्ति दिखाई देता है दूसरी तरफ वो एक क्रूर व्यक्ति बनने की ओर आगे चलता है ∣
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